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जिन्ना का जिन्न

05 Oct 2018 Comments: 0 Views: 
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Ravi-Kumar-Sinha
Posted by Ravi-Kumar-Sinha
बनना, संवारना, और बिखर जाना यही इस प्रकृति का एकमात्र सत्य है. सभ्यता, संस्कृति, देश, राज्य और इंसान इस दुनिया में हर एक चीज पर यह सिधांत लागू होता है. भारत के परिपेक्ष्य में भी ये बातें अक्षरशः सत्य हैं. यहाँ के लोगों ने भी सभ्यताओं, धर्म और इंसानी फलसफा को बनते और बिगड़ते कई बार देखा है. यहाँ के लोगों ने देश की सरहदों को कई बार बढ़ते और घटते हुए देखा है. आपसी भाईचारे को कभी बेहद मजबूत तो कभी बेहद कमजोर शक्ल में देखा है. यही हमारा इतिहास है और शायद यही हमारा भविष्य भी होगा. पर इस इतिहास से बहुमत इत्तेफाक नहीं रखता है. अपना लिखा इतिहास और अपना बताया भूगोल अपने लोगों के बीच फैलाना इस हिस्से के लोगों का प्रिय शगल रहा है.
अंग्रेजो के भारत आने और राज करने के पीछे भी शायद भारतियों का इतिहास और भूगोल के प्रति कोई एक धारणा न होना ही रहा. कई शताब्दियों के इस्लामिक शासन ने भारत में जो संस्कृति बनाई वो सतही तौर पर मिलनसार जैसी रही पर अन्दर ही अन्दर एक बहुत बड़ी खाई बनती रही. हिन्दू अपनी प्राचीन सभ्यता की दुहाई देते रहे जबकि मुसलमान शासक वर्ग की खुमारियों से बहार नहीं निकल पाए. इसी आपसी नासमझियों का कारण था की देश पर किसी भूमिपुत्र का शासन नहीं रह गया. बड़ी दुश्वारियों के बाद जब अंग्रेजों के जाने की बारी आई और भूमिपुत्र/पुत्रियों के शासन का समय आया तो फिर से इतिहास और भूगोल का ज्ञान सामने आ खड़ा हुआ. देश इससे पहले की बनता, संवारता, बिखर गया. शासन तो हाथ में आया पर कीमत इतिहास, भूगोल दोनों ने चुकाया.
Gandhi
अब एक बार फिर देश में इतिहास बोध और भूगोल का ज्ञान सर उठा रहा है. इस बार बोतल से निकला है जिन्ना का जिन्न. ये जिन्न क्यों बाहर आया ये जानना ज्यादा मुश्किल नहीं है. ये हमारी आदत में शुमार रहा है. हम बिना इन मुद्दों के जी ही नहीं सकते. दरअसल इस क्षेत्र का साझा इतिहास और साझा भूगोल न लोगों को उगलते बनता है न निगलते, परेशानी बस इतनी सी है. इसी कारण पहले देश दो भागो में बंटा और देखते ही देखते पता चलने से पहले ही तीन भाग हो गए. धर्म के नाम पर बंटने वाला पहला देश होने के बावजूद पाकिस्तान ने अपना भूगोल चंद सालों में ही बदल दिया. धर्म एकजुट न रख सका, भाषाई पहचान और संस्कृति हावी हो गयी. हमारे लोगों की यही पहचान है, जी हाँ हमारे लोग यानि आज के भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश. साझी संस्कृति, साझी जमीन, साझा खाना होने के बावजूद एक दुसरे को नकारने की जिद, एक दुसरे से लड़ने की जिद, एक दुसरे के बर्वादी की जिद. पिछले कई शताब्दियों से ये खेल चला आ रहा है और न जाने कब तक ये खेल चलता रहेगा. ये समझना बेहद जरूरी है लाख लकीरें खींच लेने के बावजूद लोगो का खून, उनका डीएनए कभी बदल नहीं पायेगा. मोहम्मद अली जिन्ना भी इसी डीएनए के इंसान थे. अपने आप को लाख अलग करने के बाद भी भारत न अपने को जिन्ना से अलग कर सकती है न ही पाकिस्तान को. यही बात पाकिस्तानियों पर भी लागू होती है, न तो वो भारत से पीछा छुड़ा सकते है न ही अपने अतीत से. आज के भारत को अब इन चीजों को ज्यादा तेजतर्रार ढंग से सामना करना चाहिए. उन्हें इतिहास को समझने का मौका नई पीढ़ी को देना चाहिए. जिन्ना जैसे थे वैसे क्यों थे ये समझने की एक और कोशिश करनी चाहिए. उनकी प्रसांगिकता आज क्यों है इसे जानने की ईमानदार कोशिश होनी चाहिए.
Jinnah M
भारत, पकिस्तान और बांग्लादेश को अपनी साझा इतिहास और भूगोल नई पीढ़ी को बताना ही होगा. कब तक हम धर्म का सहारा लेते रहेंगे और लगभग 5000 साल पुराना जो इस क्षेत्र का जीवनकाल है उसकी कहानी अपने-अपने ढंग से बताते रहेंगे. प्राचीन हिन्दू इतहास, मध्यकालीन इस्लामिक शासन और हालिया अंग्रेजो का प्रभाव सभी पर ईमानदारीपूर्वक चर्चा तीनो देशों में होनी चाहिए. एक ऐसी समझ विकसित की जानी चाहिए जहाँ इस पुरे खित्ते में पैदा हुए हर इंसान को अपना समझा जा सके. धर्म को जिस दिन व्यतिगत मामला बनाकर राजनीति से अलग करने की कोशिश अगर सभी करे तो इस क्षेत्र से खुशहाल शायद ही कोई और होगा. पर ये बाते कहने के लिए है, हम एक दुसरे से नफरत करने के लिए पैदा हुए है और पता नहीं एक दुसरे से कब तक नफरत करते रहेंगे. इसी नफरत की पैदाइश है जिन्ना. ये जिन्न बाहर आता रहेगा, हम सभी को डरता रहेगा, लोगों को बांटता रहेगा. इस जिन्न को अगर बोतल में रखना है तो हमें हर हाल में नफरत को हराना होगा, साझा इतिहास और भूगोल की कहानी को दोहराना होगा..नहीं तो जी तो हम रहे ही हैं...
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